पुलिस के पास जब कोई सबूत नहीं होता तो उसे नार्को, ब्रेन मैपिंग टैस्ट याद आते हैं

आरुषी कांड में पुलिस अंधेरे में लठ्ठ चला रही थी उसके पास कोई भी सबूत नहीं था मीडिया की लगात बौछार से त्रस्त यूपी पुलिस ने आरुषी के मां बाप को धर दबोचा. एक दिवंगत बच्ची के संबन्ध नौकर से बताये. उसके मात पिता के संबध अन्य परिवार के मित्रों से बताये. बार बार नार्को टैस्ट और ब्रइन मैपिंग कराया गया और पुलिस बार बार दोहराती रही कि उसके पास सबूत हैं लेकिन बाद में क्या निकला?

पुलिस के पास जब कोई सबूत नहीं होता तो उसे नार्को, ब्रेन मैपिंग टैस्ट याद आते हैं

प्रग्या ठाकुर के मामले में भी महाराष्ट्र की कांग्रेसी सरकार की पुलिस एटीएस के पास सिर्फ यही पता चला है कि ब्लास्त में उस मोटरसाइकिल का उपयोग हुआ है जो प्रग्या ठाकुर द्वारा बेची जा चुकी थी. इसके अलावा कोई सबूत नहीं है. महाराष्ट्र की कांग्रेसी सरकार की पुलिस द्वारा प्रग्या का को नार्को टेस्ट कराया गया था इसमें प्रग्या के खिलाफ कुछ भी साबित नहीं हो पाया है.

अब महाराष्ट्र एटीएस के हाथ पांव फूले हुये हैं और वह हवा में लठ्ठ मार रही है बिल्कुल उसी तरह जिस तरह आरुषी कांड में यूपी पुलिस मार रही है, फिलहाल कांग्रेसी सरकार चाहती है कि मामला थोड़ा खिंचे और राज्य विधान सभाओं में जो चुनाव हो रहे हैं तब तक मामला खिंचता रहे और उसे इसका राज+अनैतिक फायदा मिल सके. इसके लिये महाराष्ट्र की कांग्रेसी सरकार की पुलिस प्रग्या ठाकुर का फिर नार्को, ब्रेन मैपिंग टैस्ट कराना चाहती है. क्योंकि;

पुलिस के पास जब कोई सबूत नहीं होता तो उसे नार्को, ब्रेन मैपिंग टैस्ट याद आते हैं.

जनता की याददाश्त तो बहुत कमजोर है, उसे क्या याद रहेगा कुछ भी

फिलहाल तो कांग्रेस चौकड़ी की मंशा है कि सीरियल ब्लास्ट के बाद भारतीय जनमानश में जो रोष उपजा है वह शांत हो जाये.
क्या हमारी याददाश्त वाकी इतनी कमजोर है?

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4 Responses to “पुलिस के पास जब कोई सबूत नहीं होता तो उसे नार्को, ब्रेन मैपिंग टैस्ट याद आते हैं”

  1. Web Media Says:

    I also feel so, Aapko Dhanyavaad, A very vital fact you have high lighted

  2. ghughutibasuti Says:

    याददाश्त ? ऐसी कोई चीज भी होती है, याद नहीं । जब तक मीडिया में चटखारे लेने को कुछ मिलता रहे हमें कुछ याद नहीं । बिना सबूतों के किसी का भी नाम उछालना हमारी आदत हो गई है । प्रग्या हो या कोई और, पहले सबूत जुटा लेने चाहिए फिर मीडिया को न्यौता देना चाहिए ।
    घुघूती बासूती

  3. संजय बेंगाणी Says:

    हमारी याददाश्त कमजोर है.

  4. सबूत नहीं थे - भोंसला मिलिट्री स्कूल के कमांडेंट एसएस रायकर को एटीएस ने छोड़ा « Digambarjain’s Blog Says:

    [...] Digambarjain’s Blog Just another WordPress.com weblog « पुलिस के पास जब कोई सबूत नहीं होता तो उ… [...]

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